इस मूवी के कारण से खास था वर्ष 2018 का प्रथम शुक्रवार

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इस मूवी के कारण से खास था वर्ष 2018 का प्रथम शुक्रवार

फिल्मों के लिए शुक्रवार जितना जरूरी है, शुक्रवार के लिए फिल्में भी उतनी ही जरूरी हैं. किन्तु 5 जनवरी वाला बीता शुक्रवार इन दोनों मायनों में काफी खास रहा. 45 वर्ष  बाद बीते शुक्रवार एक कश्मीरी फीचर फिल्म रिलीज हुई. धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में कई फिल्मों की शूटिंग हुई है, किन्तु कश्मीर में कश्मीर के लोगों की बनाई कोई फिल्म कश्मीर से बाहर पहुंची हो, ऐसा लंबे अरसे से नहीं हुआ था.

इसकी शुरुआत की कश्मीर में पत्रकार से थियेटर बने हुसैन खान ने. उन्होंने कश्मीर डेली के नाम से एक फिल्म बनाई, जो 5 जनवरी को रिलीज हुई. ये फिल्म दिल्ली के आर.के.पुरम स्थित पीवीआर संगम और मुंबई के इनफिनिटी मलाड पीवीआर में भी रिलीज की गई.

विडंबना ये है कि कश्मीर में कश्मीर के लोगों द्वारा बनी इस फिल्म को कश्मीर में ही रिलीज नहीं किया जा सका. कश्मीर में कोई थियेटर खुला न होने की कारण से ऐसा हुआ. 1998 के बाद से कश्मीर घाटी के 11 थियेटर बंद पड़े हैं. कई थियेटर को अस्पतालों तक में तब्दील कर दिया गया है.

फैंटम, बजरंगी भाईजान, जग्गा जासूस और डैडी जैसी फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं.

वर्ष 1972 में आखिरी कश्मीरी फिल्म शायर-ए-कश्मीर महजूर रिलीज हुई थी. फिल्म में कश्मीर के जाने-माने एक्टर मीर सरवर ने मुख्य भूमिका निभाई है. इससे पहले मीर
 
 

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