दुनिया केवल उन्हीं लोगों को याद रखती है, जिनके काम खास होते हैं बाकि भीड़ में खो जाते हैं:Mohit Johari

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इस जीवन में मिली ज़िन्दगी को आप दो तरीकों से बिता सकतें हैं:

पहला: चर्चा करते हुए कामयाब किरदारों की ,
दूसरा: खुद चर्चा बन जाएं।

पहला तरीका : चर्चा करते हुए कामयाब किरदारों का

अगर गौर करें तो हम यह आराम से देख पाएंगे की जो आज अपने जीवन में सफल नही हो पाए हैं उसकी सिर्फ दो ही वजह होती हैं एक तो यह कि वो अपनी योग्यता और काबिलियत का आकलन सही से नही कर सके।

खुद का आकलन तुलनात्मक तरीके से न करें:

कभी भी खुद की तुलना किसी दूसरे से करनी ही नहीं चाहिए,क्योंकि ईश्वर ने हर इंसान में अलग काबिलियत,अलग गुण और अलग छमताये दीं है।
अगर खुद की काबिलियत को सही समय पहंचान गए तो आप अपनी पहचान बना लेंगें।

इंसान जब खुद की तुलना दूसरों से करना शुरू कर देता है तो वहीं वो हार की तरफ अपना पहला कदम बढ़ा बैठता हैं।

कहने का आशय यह कि आप कभी यह न कहें कि मुझे उसके जैसा बनना हैं ,कहना यह कि मुझे वो सफर तय करना है जिस सफर को तय करने के लिए ईश्वर ने छमताओं रुपी वाहन दिया है।

ऐसा करने से अगर आप हार भी गए तो आप जनांब उस सफर में हारेंगे जो आपका था।

अगर आप गायकी का शौक़ रखतें है और आवाज़ बुलंद है तो खुद को गायकी के सफर में दौड़ाएं, न कि खुद की तुलना किसी ऐसे खिलाड़ी से करें कि जो आपके सफर का है नहीं।

दूसरा तरीका: खुद चर्चा बन जाएं

बहाना नही वजह तलाशिये:

हर एक उद्देश्य को पूरा करने में कठिनाइयां आती ही हैं,क्योंकि अगर आसानी से ही हर किसी को मंज़िल मिल जाये तो वो मंज़िल खास नहीं बल्कि आम होगी।

जो हर कार्य में,हर एक प्रणली में बहाना दूँढते हैं वो अपनी मंज़िल तक नही पहुँच सकते।

किसी भी उद्देश्य को पूरा करने में अगर हम अगर सिर्फ कठिनाई या आ रही दिक्कतों पर निगाह रखे रहेंगे तो यकीन मानिए उस उद्देश्य को आप पूरा कर ही सकते।
यहीं अगर यह सोंच कर देखें कि यदि यह मकसद हम पूरा कर लें तो आने वाले समय में हम अपनी स्थिति सुधार सकतें हैं।

उज्ज्वल भविष्य के लिए यह जरूरी है कि आप Past का बोझ अपनी पीठ पर न लादने की आदत डालें 

कहने की मंशा यह कि आज आपका Present यदि Continuous है तो Future Perfect खुद ही हो जायेगा।

तय आपको करना है कि आने वाली अपनी पीढ़ी को मिसाल देनी है या नसीहत।

 

“आने वाली पीढ़ी के हांथों में क्या देना है यह आप पर निर्भर करता है।”

 

  • ठान लीजिये अपनी मंज़िल को ।।
  • लगाइए ताकत जितनी भी हो।।
  • बदल दीजिये सिस्टम को ।।
  • बन जाइये खुद ही सिस्टम।।

भीड़ का हिस्सा नहीं बल्कि भीड़ के सामने किरदार बनकर खड़े होइए।

         ।।। ” बन जाइये न चर्चा ” ।।।

 

Mohit Johari

Director at “HUM Hain Na” Group

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