नोटबंदी-GST इंपैक्ट: कर्मचारियों को गाड़ी-फ्लैट देने वाले गुजराती कारोबारी इस बार बोनस भी नहीं दे पाए

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नोटबंदी-GST इंपैक्ट: कर्मचारियों को गाड़ी-फ्लैट देने वाले गुजराती कारोबारी इस बार बोनस भी नहीं दे पाए

पीएम मोदी द्वारा गौरवान्वित करके प्रारंभ की गई नोटबंदी तथा GST प्रोजैक्ट अधूरी तैयारियों की कारण से व्यापारियों तथा जनता के लिए परेशानी ही साबित हुई हैं. गाहे-बगाहे कुछ ऐसी खबरे आ ही जाती है जिसमें नोटबंदी तथा GST के  व्यापारियों पर पड़ी मार साफ दिखाई पड़ती है.

गुजरात के व्यापारियों के साथ परेशानियाँ ये है कि वो अपना दर्द भी सही से बता नहीं पा रहे है  क्योंकि नोटबंदी तथा GST के अगेंस्ट में बोलते ही 1 तो वो प्रदेश की BJP सरकार के निशाने पर आ जाएंगे दूसरा विरोध करते ही वो देशद्रोही करार दे दिए जाएंगे.

पिछले वर्ष दिवाली पर अपने वर्कर्स को 400 फ्लैट तथा 1000 कारें गिफ्ट करके चर्चा में आए सूरत के हीरा व्यापारी शावजी ढोलकिया ने इस वर्ष कोई गिफ्ट नहीं दिया. परन्तु  वो इसकी वजह भी नहीं बता पा रहे हैं.

परन्तु ऐसा कहा जा रहा है कि जीएसटी,नोटबंदी तथा विभिन्न आर्थिक शाखा (एजेंसियों) द्वारा की जा रही कार्रवाई के चलते गुजरात के बिजनेस आर्थिक परेशानी में हैं. मानो ढोलकिया ने अपने निर्णय के पीछे जीएसटी या नोटबंदी को कारण नहीं बताते.

2015-2016 में बांटे कार और आभूषण- 

ढोलकिया हरे कृष्णा एक्सपोर्ट के ऑनर हैं, उनकी कंपनी में लगभग 500 कर्मचारी हैं तथा कंपनी का लगभग छह हजार करोड़ रुपये का प्रतिवर्ष कारोबार है. ढोलकिया पहली बार तब चर्चा में आए थे जब वर्ष 2015 में दिवाली पर उन्होंने अपने 1200 कर्मचारियों को 491 फिएट पंटो कारें, 200 फ्लैट तथा आभूषण दिए थे.

वर्ष 2016 में ढोलकिया ने दिवाली पर दरियादिली दिखाते हुए 2000 कर्मचारियों को डॉटसन रेडी-गो, आभूषण तथा मारूती अल्टो कारें गिफ्ट किए थे. गुजरात में कारोबारी भी दिवाली के साथ अन्य त्योहारों पर कर्मचारियों को गिफ्ट देते रहे हैं परन्तु ढोलिकया जैसी सज्जनता शायद ही किसी ने दिखायी हो.

ढोलकिया जी भले ही मना करें परन्तु इस वर्ष उनके द्वारा उपहार न दिए जाने के पीछे GST  को बडा कारण मानने के पीछे ठोस आधार हैं. 1 जुलाई से लागू GST ने केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को दिए 50 रुपये से ज्यादा मूल्य के उपहार को टैक्स के दायरे में रखा है. ऐसे में किसी भी कारोबारी के लिए महंगे उपहार देना पहले जैसा सहज नहीं रहा.

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