महिलाओं को मस्जिदों में इंट्री दिलाने के लिए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर

महिलाओं को मस्जिदों में इंट्री दिलाने के लिए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर

तीन तलाक के बाद अब एक बार फिर मुस्लिम महिलाओं के लिए हिंदूवादी संगठन नया शगूफा छोड़ा है. जिसके तहत फिर से संगठन तीन तलाक की तरह मुस्लिम महिलाओं का हिमायती दिखना चाहता है. दरअसल, केरल हाई कोर्ट में एक हिंदूवादी संगठन ने बुधवार को जनहित याचिका दायर कर अनुरोध किया की कि वह केंद्र को महिलाओं को नमाज के लिए मस्जिदों में प्रवेश पाने के लिए आदेश जारी करने का निर्देश दे.

मस्जिदों में जाने और नमाज नहीं पढ़ने देने में उनके साथ होता है भेदभाव 
याचिकाकर्ता ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति संबंधी हाई कोर्ट के हाल के फैसले के संदर्भ में समय की मांग है कि मुस्लिम महिला श्रद्धालुओं को भी नमाज के लिए पुरुषों के साथ मस्जिदों में प्रवेश मिले. याचिकाकर्ता का कहना है कि महिलाओं को मस्जिदों में मुख्य उपासना सभागार में प्रवेश और नमाज नहीं पढ़ने देने से उनके साथ भेदभाव किया जाता है. स्वामी देथात्रेय साई स्वरुप नाथ ने यह याचिका दायर की है. वह अखिल भारत हिंदू महासभा की केरल इकाई के अध्यक्ष हैं.

महिलाओं को मस्जिदों में जाने की इजाजत 
महिलाओं को मस्जिदों में जाने की इजाजत पहले से ही इस्लाम के तहत मिली हुई है. लेकिन हर मस्जिद में नहीं. बल्कि उन्हीं मस्जिदों में उन्हें जाने की इजाजत है जहां उनके लिए खास इंतजाम किए गए हैं. उदाहरण के तौर पर दिल्ली की जामा मस्जिद को देखा जा सकता है. यहां मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद के अंदर जाने और नमाज अदा करने की खुली छूट है.

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