राजस्थान के करौली में हिंसा, बीजेपी की दलित विधायक और पूर्व मंत्री का जलाया घर

भारत बंद में व्यापक हिंसा के बाद राजस्थान के करौली में मंगलवार (3 अप्रैल) को हिंसा भड़क गई। भारत बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सोमवार (2 अप्रैल) को कथित तौर पर बस से यात्रा कर रही महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटना हुई थी। इसके विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर गए थे। आक्रोशित लोगों ने हिंडौन से भाजपा की मौजूदा दलित विधायक राजकुमारी जाटव और राजस्थान की पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता भरोसी लाल जाटव के घरों में आग लगा दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिंडौन के स्थानीय व्यापारियों ने भी सोमवार को दुकानों में की गई तोड़फोड़ और हिंसा के खिलाफ मंगलवार को बंद का आह्वान किया था। व्यापारियों का आरोप है कि बाजार बंद कराने के नाम पर व्यवसायियों के साथ मारपीट और लूटपाट की गई थी। वाहन भी जला दिए गए थे। इसके विरोध में बड़ी संख्या में जुटे लोग कलेक्टर को ज्ञापन देने जा रहे थे, लेकिन माहौल को तनावपूर्ण देखते हुए धारा 144 लगा दी गई थी। इसके बावजूद आक्रोशित लोग नहीं माने। बताया जाता है कि यहां तकरीबन 40,000 लोग इकट्ठा हो गए थे। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। आरोप है कि इसी भीड़ ने भाजपा विधायक और कांग्रेस नेता के घरों में आग लगा दी। भीड़ का गु्स्सा इतना उग्र था कि उसने छात्रावास को भी नहीं छोड़ा। गुस्साए लोगों ने अनाज मंडी स्थित दलित छात्रावास को भी आग के हवाले कर दिया। हालांकि, बाद में आग पर काबू पा लिया गया।

शॉपिंग मॉल में लगाई आग: सोमवार को हुई हिंसा के विरोध में जुटे हजारों लोगों ने सिर्फ नेताओं को ही निशाना नहीं बनाया। उग्र भीड़ ने एक मॉल में भी आग लगा दी। इसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। हिंसक घटनाओं के बाद करौली में हालात तनावपूर्ण बना हुआ है। पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है। बता दें कि सु्प्रीम कोर्ट ने पिछले महीने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारक) कानून को लेकर अहम फैसला दिया था। अब एससी/एसटी से जुड़े मामलों में बिना किसी जांच के गिरफ्तारी नहीं की जा सकेगी। इस कानून में अग्रिम जमानत का भी प्रावधान नहीं है, लेकिन शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में अपवाद का प्रावधान भी जोड़ दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया गया था। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक पैमाने पर हिंसा हुई। इसमें दस लोगों की जान चली गई थी। इसके अलावा सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा था।

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