गुजरात में अप्रसन्न पाटीदारों ने किया बीजेपी का बहिष्कार, गांवों में बीजेपी नेताओं के घुसना निषेध

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गुजरात में अप्रसन्न पाटीदारों ने किया बीजेपी का बहिष्कार, गांवों में बीजेपी नेताओं के घुसना निषेध

गुजरात में पाटीदार अनामत आंदोलन में पाटीदारों के साथ bjp सरकार में हुई अति को जनता भूल नही पा रही है. bjp में अधिक संख्या में पाटीदार मंत्रियो के होने के बाद भी ग्रामीण स्तर पर कंजूसी में जी रहा पाटीदार प्रधानमंत्री मोदी के लालच में आकर bjp को मतदान देने को कतई राज़ी नहीं है.

गुजरात वोटिंग bjp तथा कांग्रेस दोनों के लिए ही आवश्यक हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा वोटिंग प्रचार में सबसे अधिक गुजरात के डेवलपमेंट मॉडल को ही गौरवान्वित किया था.परन्तु पाटीदार आंदोलन में हार्दिक, OBC आंदोलन में अल्पेश तथा दलित-मुस्लिम आंदोलन के समय  जिग्नेश मेवाणी ने नरेन्द्र मोदी के विकास (डेवलपमेंट) के दावे की खूब तोहीन की.

पाटीदार आंदोलन के समय  पुलिस की गोलियों तथा लाठीचार्ज के शिकार हुए पाटीदार जवानों  के परिवार वालो को अपने गांवों में bjp के किसी भी नेता को आने नहीं देना चाहते.इसलिए गुजरात के पाटीदार बाहुल्य कई गांवों में स्थानीय लोगों तथा ग्रामीणों ने bjp के लोगों को गांव के अंदर प्रवेश करना भी निषेध है.

गुजरात निवासी तथा गुजरात के तीन बार सीएम रहे पीएम के लिए यह 1 असुविधाजनक स्थिति है. पिछले वोटिंग में जो हार्दिक पटेल समुदाय bjp का सशक्त समर्थक रहा, आज उसने ही इस बार ‘bjp हराओ’ का नारा ऊपर उठाया हुआ है.

हार्दिक  पटेल समुदाय का संचालन करने वाले हार्दिक हर रोज bjp पर निशाना साध रहे हैं गुजरात की आबादी 6 करोड़ 27 लाख है. इसमें हार्दिक पटेल-पाटीदार की संख्या लगभग 20 फ़ीसदी है.

गुजरात में bjp को जिताने का श्रेय पटेलों के समुदाय को जाता है-  

गुजरात में पटेलों में 2 मुख्य-समुदाय हैं. इनमें 1 लेउवा पटेल तथा दूसरा कड़वा पटेल. तथा हार्दिक पटेल, कड़वा पटेल समुदाय से हैं.पूर्व cm केशुभाई पटेल लेउवा समुदाय में आते हैं, जिनकी कूटनीति खत्म करने का इलज़ाम मोदी पर लगता रहा है.

1990 से शंकर सिंह की कांग्रेस सरकार में राजपूत जाति के बढ़ते प्रभाव से परेशान होकर 2तिहाई से अधिक पटेल, bjp के पक्ष में मतदान करते आ रहे हैं.

पाटीदार समुदाय  में लेउवा समुदाय का भाग 60 प्रतिशत तथा कड़वा का भाग 40 प्रतिशत है.कांग्रेस को कड़वा समुदाय के मुकाबले लेउवा समुदाय से अधिक समर्थन मिलता रहा है. पाटीदार समुदाय संगठित होकर वोटिंग करता है.

पिछले इलाक्सन 2012 के डाटा को देखें तो लेउवा समुदाय पटेल के 63 प्रतिशत तथा कड़वा समुदाय पटेल के 82 प्रतिशत मतदान bjp को मिले थे. 

क्या है पटेलों की मांग ?

हार्दिक की मांग पटेल-पाटीदार समुदाय को OBC की सूचीपत्र में इन्क्लुड कराने की है. इस कारण शिक्षा तथा नौकरी में उन्हें संदेह मिल सके. इसके लिए हार्दिक पटेल ने कांग्रेस को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि कांग्रेस का कहना है कि सत्ता में आने के बाद पाटीदारों के स्वाभाविक आरक्षण के लिए वो क्या करेगी?

यह डिमांड कांग्रेस के लिए भी 1 ललकार है इसलिये हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पिछड़े वर्ग के नेता अल्पेश ठाकोर निरन्तर पाटीदारों को OBC कोटे में से आरक्षण देने के अगेंस्ट में रहे हैं तथा यही उनकी राजनीति का मुख्य आधार रहा है.

 

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