परिजन बोले- नक्सली धमकाते हैं, पुलिस सुलह का दबाव बना रही

पीड़ित परिवार ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, कहा- न्याय नहीं मिला तो कर लेंगे आत्महत्या
8 जून 2015 को पुलिस की नक्सलियों के साथ मुठभेड़ को बताया फर्जी
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने 12 लोगों की हत्या कर फर्जी मुठभेड़ दिखा दी
रांची. बकोरिया कांड में मारे गए पारा शिक्षक उदय यादव और नीरज यादव के परिजन बुधवार को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिलने पहुंचे। मुलाकात नहीं हुई तो राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया। इसमें कहा है कि झारखंड जनमुक्ति परिषद (जेजेएमपी) के नक्सली गवाहों को धमका रहे हैं। पुलिस उन्हें सुरक्षा देने के बजाय सुलह करने का दबाव बना रही है। केस वापस लेने के लिए प्रलोभन दिया जा रहा है। जांच में और देरी हुई तो परिवार के सदस्यों के साथ आत्महत्या कर लेंगे।

पुलिस ने गढ़ी फर्जी मुठभेड़ की कहानी

पलामू के सतबरवा ओपी स्थित बकोरिया में 8 जून 2015 को पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में 12 लोग मारे गए थे। मृतकों के परिजनों का आरोप था कि पुलिस ने इनकी हत्या कर फर्जी मुठभेड़ दिखा दिया। उदय के पिता जवाहर यादव ने कहा कि सीबीआई ने अब तक मामले की ढंग से जांच शुरू नहीं की है। पुलिसवाले कहते हैं कि इस मामले में बड़े-बड़़े पुलिस अधिकारी शामिल हैं। वह किसी भी सूरत में केस नहीं जीत पाएंगे। जेजेएमपी के नक्सली भी धमकी देकर मिलने के लिए बुलाते हैं। इससे पूरा परिवार डरा-सहमा है। उनलोगों की कभी भी हत्या हो सकती है।

जांच अफसर बदले, गवाहों के बयान तक दर्ज नहीं

ज्ञापन में कहा गया है कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए पीड़ित परिवार के सदस्यों ने कई बार मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह सचिव और सरकार को आवेदन दिया। सीबीआई ने 19 नवंबर 2018 को नई दिल्ली में केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। पहले डीएसपी केके सिंह को जांच अधिकारी बनाया। जांच तेज हुई तो आनन-फानन में उनकी जगह डीएसपी डीके राय को जांच अधिकारी बना दिया गया। इस मामले में सीबीआई ने गवाहों का बयान तक दर्ज नहीं किया है। सीबीआई का कोई अफसर मौके पर भी नहीं गया।

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