गणितज्ञ आर्यभट्ट की जयंती को कोई राजनीतिक दल याद नहीं करेगा क्योकि आर्यभट्ट वोट की उर्वरा भूमि नहीं :मोहित जौहरी

महान गणितज्ञ आर्यभट्ट को कोई राजनीतिक दल याद नहीं करेगा क्योकि आर्यभट्ट वोट की उर्वरा भूमि नहीं है !

  • आज भारत के विश्वस्तरीय गणितज्ञ आर्यभट्ट जी की जयंती है !
    आर्यभट्ट जिन्होंने दुनिया को शून्य की समझ दी उनकी जयंती पर सह्रदय कोटिशः नमन !

देश में वोटबैंक की गणित आज भारत के विश्वस्तरीय गणितज्ञ आर्यभट्ट जी पर भारी पड़ती है।

ऐसा इसलिए क्योंकि आर्यभट्ट वोट की उर्वरा भूमि नहीं है ।

आज सभी राजनैतिक पार्टियों में जो वोटबैंक की होड़ है वो प्रत्यक्ष रुप से सामने हैं।

*चाहें तिरंगा हो या फूल की मालाएं हों या मोमबत्तियां मौकों पर ही बनती और बिकती हैं।

आज यहां धर्म की राजनीति , समाज की राजनीति, सम्प्रदाय की राजनीति में नेता बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

वोटबैंक के लिए ये मंदिर भी जाते हैं और दरगाह भी।बड़ी बड़ी बातें ,बड़े बड़े वादे।

आज वोटबैंक की राजनीति ही है कि आर्यभट्ट जैसी शख्सीयत याद नहीं की जाती।

आइये जानिए महान गणितज्ञ आर्यभट्ट के योगदान :

*स्थानीय मान प्रणाली और शून्य

* पाई का काफी सही मान 3.1416 निकाला

* त्रिकोणमिति में व्यूत्क्रम साइन फंक्शन के विषय में बताया।

* जानकारी दी कि खगोलीय पिंडों का आभासी घूर्णन पृथ्‍वी के अक्षीय घूर्णन के कारण होता है.

*क्षेत्रमिति और त्रिकोणमिति

समय की आधुनिक अंग्रेजी इकाइयों में जोड़ा जाये तो, आर्यभट की गणना के अनुसार पृथ्वी का आवर्तकाल (स्थिर तारों के सन्दर्भ में पृथ्वी की अवधि)) २३ घंटे ५६ मिनट और ४.१ सेकंड थी; आधुनिक समय २३:५६:४.०९१ है। इसी प्रकार, उनके हिसाब से पृथ्वी के वर्ष की अवधि ३६५ दिन ६ घंटे १२ मिनट ३० सेकंड, आधुनिक समय की गणना के अनुसार इसमें ३ मिनट २० सेकंड की त्रुटि है। नक्षत्र समय की धारण उस समय की अधिकतर अन्य खगोलीय प्रणालियों में ज्ञात थी, परन्तु संभवतः यह संगणना उस समय के हिसाब से सर्वाधिक शुद्ध थी।

 

 

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